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Showing posts from November, 2016

पतझड़

टहनी पर लहराते हुए
तुम काफी रंगीन लग रहे हो

कुछ हरा जीवन का
कुछ काला है ईर्ष्या का
कोनों पर कुछ भूरा बदलाव का
और कोनों पर ही भूरा उदासी का

हरा उस अतीत के लिए जो तुम्हारा था
ईर्ष्या टहनियों पर तुमसे हरे पत्तों के लिए
उदासी आने वाले विरह के लिए
उदासी ज़मीन पर गिरे दोस्तों के लिए

मगर सच बोलो, एक ही टहनी पर रहकर
कुछ तोह ऊब गए होगे तुम
और नहीं भी ऊबे हो
कुछ नया करने में क्या हर्ज़ है

इस हवा पर भरोसा रखना
यह तुम्हे नए नज़ारे दिखाएगी
कुछ परिंदों सा आसमान में उड़ाएगी
कुछ हम इंसानों सा ज़मीन पर दौड़ाएगी

जब तुम्हे कोई नज़ारा भा जाए
हवा को वहीँ थमने को बोल देना
किसी नये पेड़ से लिपटकर गाना
फिर और भी रंगीन हो जाना

Untitled

My captives, they are very generous,Whenever I've asked for freedom,They have always agreed,And increased the size of my cage.