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पतझड़

टहनी पर लहराते हुए तुम काफी रंगीन लग रहे हो कुछ हरा जीवन का कुछ काला है ईर्ष्या का कोनों पर कुछ भूरा बदलाव का और कोनों पर ही भूरा उदासी का हरा उस अतीत के लिए जो तुम्हारा था ईर्ष्या टहनियों पर तुमसे हरे पत्तों के लिए उदासी आने वाले विरह के लिए उदासी ज़मीन पर गिरे दोस्तों के लिए मगर सच बोलो, एक ही टहनी पर रहकर कुछ तोह ऊब गए होगे तुम और नहीं भी ऊबे हो कुछ नया करने में क्या हर्ज़ है इस हवा पर भरोसा रखना यह तुम्हे नए नज़ारे दिखाएगी कुछ परिंदों सा आसमान में उड़ाएगी कुछ हम इंसानों सा ज़मीन पर दौड़ाएगी जब तुम्हे कोई नज़ारा भा जाए हवा को वहीँ थमने को बोल देना किसी नये पेड़ से लिपटकर गाना फिर और भी रंगीन हो जाना

Untitled

My captives, they are very generous, Whenever I've asked for freedom, They have always agreed, And increased the size of my cage.

शीर्षकहीन

एक पेड़ खिड़की से दिखता था मचलता झूलता हमेशा नज़र आता था पर बाहर जब भी मैं जाता था शांत होकर खड़ा हो जाता था वापिस अंदर आने पर मेरे फिर अपना नाच शुरू कर देता था ये सिलसिला काफी दिन चला और थमने का नाम नहीं लिया एक दिन मैंने खिड़की तोड़ दी और फिर कभी बाहर नहीं देखा

The Swing by the Sea

By the sea I was standing by the swing As you came by and sat I stepped back Pulled the swing And let it loose Slowly you opened your wings And everytime the swing came back Your warm wings crashed on me I never saw your face I knew your mind was empty I knew you stared at the horizon Just as I thought The wings would only trace this pendulum You flew towards the setting sun Do you know how to swim? Do you know there's no island in sight? Do you know it will be dark soon? Or that Even if you change your mind You might be too tired to return Or did you fly away Only because you knew this all Another day I would have come with you But I just looked down And kept swinging the swing I'm not your sea I'm not your horizon But I will be here Your shore

७४९५ मील / 7495 miles

कल जब तुमने पुछा मुझसे  की मैं कैसा हूँ  मैंने कहा दिया  की मैं ठीक हूँ  जब तुमसे मैं कभी  गलती से यही पूछ लूँ  कह देना तुम भी बस इतना ही  की तुम ठीक हो  मत बढ़ाना गहराइयाँ मेरी ज़िन्दगी की  मैं सतह पर ही ठीक हूँ  मत देना पंख ऊंचाइयां छूने को  मैं ज़मीन पर ही ठीक हूँ  सतरंगी सपने जो ज़िन्दगी की तख्ती पर लिखे थे  उन्हें मिटाकर उसी धूल से  एक नया चाक बनाकर  अपने बीच कुछ रेखाएं खींच लेते हैं  क्योंकि तुम जहाँ हो, वहां रात है  और जो तुम्हारे यहाँ गुज़र चुका  मैं वही दिन हूँ  इधर बस सुबह होने वाली है 

सेंट्रल पार्क - १

आज देखा छातों  का एक खेल निराला कुछ शैतानी भरा कुछ भोला भला एक लड़का और एक लड़की अपने अपने छातों के नीचे कुछ पुराने अफ़साने याद करते बैठे हस खेल रहे थे एक और लड़का लड़की कल तक थे जिनके छाते शायद अलग आज उनकी तकदीर के साथ छाते भी एक थे एक कोने में जब पड़ी नज़र पाये दो लोग छाते से छुपे हुए ना जाने कौनसी चाहतें रिम झिम पूरी कर रह थे कुछ ऐसे भी थे कमाल जो छाते को अलग रख कर खुद ही भीगे भीगे बारिश को चख रहे थे एक छाता कहीं एकेला भी रखा था ना जाने उससे कोई छोड़ गया या फिर खुद ही आज़ाद होकर हवा के साथ उड़ा था चला आया अब जो तुम पूछो हमसे गर की हमारा वहां क्या काम था हम मुस्कुरा कर बता देंगे सच वहां छाते कौन बेच रहा था

फिर वही

याद है मझे बारिश बनकर तुम पहले भी आई थी हर साल नहीं हर मौसम नहीं पर कभी तोह आई थी इस बार भी शायद तुम आओगी पर तुम नहीं  जानती जाना मुझे दूर है रुकना तुम्हारा भी कहाँ दस्तूर है इसलिए सोचता हूँ थोड़ा डरता हूँ दरवाज़े ढाल दूँ खिदिकियां भी बंद कर लूँ मगर फितरत तो मेरी उस हवा जैसी है जो बिन कहे बिन पूछे दरवाज़े खिड़कियां तोड़ देती है तुम फिर बरस जाना मैं फिर भीग जाऊंगा